
परवाणू (सोलन)। आग लगने की घटना के बाद परवाणू औद्योगिक क्षेत्र में हाइड्रेंट की कमी फिर खली। शनिवार मध्यरात्रि में दो फैक्ट्रियों में आग की घटना के दौरान फायर कर्मियों को आग बुझाने के लिए पास के एक उद्योग के हाइड्रेंट का सहारा लेना पड़ा। अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 30 हजार से अधिक आबादी वाले परवाणू शहर में आग से बचने के लिए केवल तीन फायर हाइड्रेंट हैं। ‘अमर उजाला’ ने पिछले दिनों इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
यही नहीं परवाणू क्षेत्र में स्थापित 50 फीसदी उद्योग बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। ऐसे में भीड़ भाड़ वाले परवाणू शहर में बड़ी घटनाओं को रोक पाना फायर विभाग के लिए चुनौती भरा है। शनिवार देररात लगी आग के लिए भी फायर विभाग ने पास के एक उद्योग के हाइड्रेंट से आग बुझाई। उद्योग स्थापित करने से पहले सभी उद्योगों को फायर विभाग की एनओसी लेना आवश्यक होता है। बावजूद इसके कई उद्योग बिना फायर एनओसी लगा दिए जाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि स्थानीय फायर अधिकारी उद्योगों में यंत्र जांचने के लिए अधिकृत नहीं होते। लिहाजा उद्योगपति इसका फायदा उठा लेते हैं। इसकी पुष्टि परवाणू फायर विभाग के अधिकारी हंसराज ने करते हुए बताया कि परवाणू में 50 फीसदी उद्योग बिना एनओसी चल रहे हैं। ऐसे में आग लगने की घटना के समय दिक्कतें आती हैं।
करीब पांच सौ उद्योग परवाणू में
परवाणू। परवाणू में छोटे-बडे़ करीब 500 उद्योग स्थापित हैं। बडे़ उद्योगों में हाइड्रेंट तथा छोटे उद्योगों में आगजनी से बचने के उपकरण लगाना आवश्यक होता है। मगर कुछ उद्योगपतियों की ओर से की गई अनदेखी उन पर भारी पड़ जाती है।
इस साल अब तक पांच घटनाएं
परवाणू में इस वर्ष अब तक आग की करीब पांच घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2011 में 25, 2012 में 15, वर्ष 2013 में करीब 16 आग लगने घटनाएं हुई। इनमें अरबों की संपत्ति स्वाहा हो गई।
एनओसी की प्रक्रिया
फायर एनओसी लेने के लिए सबसे पहले स्थानीय फायर कार्यालय में एनओसी को आवेदन करना होता है। उसके उपरांत अधिकारी दौरा करते हैं तथा वह बडे़ उद्योगों में फायर हाइड्रेंट तथा छोटे उद्योगों में आग बुझाने के उपकरण लगाने के आदेश देते हैं। यह लगाने के बाद अधिकारी दोबारा दौरा करते हैं तथा संबंधित उद्योग के आवेदन शिमला मुख्य कार्यालय के लिए भेज देते हैं। विभाग की शर्तों के अनुसार प्रतिवर्ष संबंधित उपकरणों को रिफिल करवाना आवश्यक होता है।
